विश्राम स्थल

विश्राम स्थल

धुंधले धुंधले साये हैं
रोशनी मिट रही है
रंग धूल रहे हैं
भोर थक गई है
सांझ हो चली है
मेरा आंचल पकड़
मेरे पीछे पीछे आना
आशियाना तलाशते हैं कोई
किसी खेत की लहलहाती फसल पे
किसी नीड़ पे
या जमीं की रेत पे
दिनभर आसमां में उड़ान
भरते भरते थक गये
रात्रि में कहीं एक विश्राम स्थल
ढूंढ कर हम भी विश्राम करते हैं
कल सुबह भोर होने पर
फिर अपने हौसले की उड़ानों से
आसमान के हृदय स्थल पर
जीवन की नई कहानी
लिखते हैं।

मीनल

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