अधिकार

अधिकार

स्त्री की दशा का वर्णन

हर रोज़ मुनासिब कोशिश कर रही
अधिकार अपने पाने को
आँचल से ढाक रही तन को
अपनी अस्मिता बचाने को
तीर से भी तरकश निगाहे
भेद रही ना ही तन को बल्कि मन को
आत्मा को भी कर रही जर्जर
हर पल कोशिश कर रही प्रतिकार पाने को
क्यू रात और दिन के बंधन
क्यू बंदिशों के घेरे
हर कोशिश कर रही अपना अस्तित्व बचाने को
हर पल कोशिश कर रही प्रतिकार पाने को
ना गर्भ में जी पाती
ना ही इस दुनिया में चैन पाती
कभी दहेज के लिए जलाई जाती
हर दिन कोशिश करती अपना व्यक्तित्व पाने की
हर कोशिश कर रही अपना अस्तित्व बचाने को
हर पल कोशिश कर रही प्रतिकार पाने को

शालिनी जैन

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