रोग न लगने पाये
दूषित न करो जवानी
लिखनी है तुम सब को
मानवता की एक कहानी

प्रातःकाल में उठ कर के
देवो को प्रणाम करो
गुरु देव का वंदन करके
मात पिता के चरण धरो
रखो निरोगी काया अपनी
सच का पियो खूब पानी
रोग न लगने पाये
दूषित न करो जवानी
लिखनी तुम सब को है
मानवता की एक कहानी

सज-धज कर स्कूल जाओ
करो पढ़ायी मन से
बैर विरोध से दूर रहो तुम
दुर्गन्ध न निकले तन से
अच्छे पद पर होयोगे
सच्चे बनोगे हिन्दुस्तानी
रोग न लगने पाये
दूषित न करो जवानी
लिखनी तुम सब को है
मानवता की एक कहानी

शम्भू नाथ कैलाशी

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