मनमीत

यह बादलों का सागर है
रंगों की गागर है
टूटे सपने होते हैं जहाँ पूरे
क्षितिज पे फैली वो धुंधले कोहरे की
चादर है
फूल बन खिलती है एक कली
चाँद बन चमकता है एक सितारा
हर शाम डूबकर
हर सुबह उपजता है एक सूरज
भोर की किरण के साथ
सांझ ढलने तक की
नई उम्मीद लेकर
आसमान में उड़ते
पानी में नहाते पंछी
गाते हैं सुरीले गीत
सात सुरों के सात रंग लेकर
चुरा लेती है बारिश में बरसती कई बारिशों का संगीत
सावन की काली घटा
आसमां में घुमड़ते बादलों की
मनमीत बनकर।

मीनल

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