जड़ काट देता हूँ झगड़े की ||

मै तो साहब झगड़ा नहीं करता ||
जड़ काट देता हूँ झगड़े की ||
अपने पथ पर चलता रहता हूँ ||
नौबत न आती लफड़े की ||

लुच्चे और लफंगे मिलते ||
मिलते न्यायी अन्यायी ||
पी जाता हूँ गाली गलौच को ||
कड़ुयी समझ दवायी ||
हाथ जोड़ कर बच जाता हूँ ||
बजती नहीं घण्टी खतरे की ||
अपने पथ पर चलता रहता हूँ ||
नौबत न आती लफड़े की ||

सीधा साधा नहीं हूँ इतना ||
हूँ पर पेड़ बबूल का ||
चुभता नहीं किसी के दिल में ||
पक्का हूँ बहुत वसूल का ||
हर किसी के काम मैं आऊ ||
रिस्क न लेता रगड़े की ||
अपने पथ पर चलता रहता हूँ ||
नौबत न आती लफड़े की ||

लेन देन चलता रहता है || .
नियत नहीं है खोंट ||
जान बूझ कर आज तलक मै ||
न पहुंचाया किसी को चोट ||
साफ़ सुथरी प्रभु कटे जिंदगी ||
नजर नहीं रँगरूठ की ||
अपने पथ पर चलता रहता हूँ ||
नौबत न आती लफड़े की ||

शम्भू नाथ कैलाशी

Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

Leave a Reply

Close Menu