कड़वा सच

एक बस्ती है
घरों में बसी हुई
पर दिलों से उजड़ी हुई
जूम करके देखने पर भी
कुछ स्पष्ट दिख नहीं पा रहा
न जाने किस बात का गुमान है
गौर से देखा जाये
तो एक कड़वा सच यह है कि
इंसान की औकात है
जमीं पे रेंगते एक कीड़े मकोड़े सी
बस इससे ज्यादा
कुछ और नहीं।

मीनल

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