यादों का कैमरा

यादें समेट लो
दिल के किसी कोने में
लहरें जो तट को छूकर
मुड़ जायेंगी
वो फिर कभी वापिस लौटकर न
आयेंगी
किनारे वही होंगे
रेत के समंदर वही होंगे
बस दृश्य बदल जायेंगे
कैद हो गये कहीं यह
रोते मुस्कुराते
पदचिन्हों से
पत्थर की लकीरों से
दृष्टिपटल के कैमरे में
तो यादों की जब होगी
बारिश
यह किसी ताजा दृश्य से
आसमां में चमकती बिजली से
कौंध जायेंगे।

मीनल

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