बादलों के गांव में
प्रियतम तुम कहाँ खो गये
प्रेम की छांव में
घुंघरू बजाते वापिस आ जाओ
मैं आंचल से बांध लुंगी
पलकों की सांझ में
इस ढलती गोधूलि की तरह
अपने प्रेम को ढलने मत देना
दुनिया बदले कितने रंग
तुम अपने जीने के ढंग मत बदलना
तुम जैसे हो वैसे ही रहना
मेरे थे मेरे ही बनकर रहना
दूर से ही गीत सुनाते रहना
करीब हो यह अहसास दिलाते
रहना
दिल से दिल का रिश्ता
बनाये रखना
इंतजार रहेगा मुझे तुम्हारा
उम्र भर
सुबह, शाम या रात
जब जब मैं तुम्हें याद करूं
इधर उधर भटकती
तुम्हारी राह तकू
मेरे सपनों की देहरी पे
एक आशा का दीपक
जलाते रहना
अपने कहीं न कहीं होने का
अहसास कराते रहना
तुम्हारा प्रेम नहीं है अस्थाई
अमर है, अजर है
है स्थाई
इस भरोसे पे अपने
सच्चे प्यार की मोहर
लगाते रहना।

मीनल

No votes yet.
Please wait...

2 Comments

  1. Saurabh salilAggarwal

    Prem Dada sthai azar Amar hi hora jai

    Rating: 5.0/5. From 2 votes. Show votes.
    Please wait...
  2. Saurabh salilAggarwal

    Prem sada azar amar hi hota hai

    No votes yet.
    Please wait...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *