जंगल बुक अध्याय -2

वहीं दूसरी तरफ जो इस घनघोर जंगल का सरदार है
उसके पास जादुई ताकत व एक जादुई छड़ी है , जिसको वह हर वक्त अपने पास या जब कभी अपनी जादुई ताकत को अपने ध्यान द्वारा ओर अधिक बढ़ाना चाहता है तो , उस जादूई छड़ी को एक पत्थर से बने गोल घेरे के अंदर रखता है , और अपने कुछ लोगों को उस जादूई छड़ी की निगरानी के लिए उन्हें पहरेदारी के लिए नियुक्ति करता हैं , वहाँ के लोगों का मानना है कि उस सरदार को ये सारी जादूई शक्ति , कुछ वक्त पहले इस जंगल को देखने आए कुछ गोरे से रंग जैसे दिखने वाले लोगों द्वारा प्रपात हुई हैं ।
आज ना जाने वह भयानक सा दिखने वाला जंगल का सरदार जिसके चेहरे पर काली दाड़ी , सर के लंबे , लंबे बाल , ओर उसका कद लम्बा , मोटे , मोटे ,हाथ पैर , व पूरे शरीर मैं मकड़ी के जाले की तरह फैले बाल हैं , यदि कोई सामान्य मानव उस सरदार को एक बार देख ले तो बेहोश हो जाये ।
वह अपने साथ एक औरत को जंजीरों से बाधें , ओर खिंचते हूऐ अपने साथ ला रहा है , उसके पीछे उस सरदार के सैनिकों की टुकड़ी है , वह उस औरत को , आगे अपनी बनाई जादूई दुनिया मैं ले जा रहा है , वह उस औरत को एक ऐसी लम्बी जादूई दीवार के पार ले जाता है , जिस दीवार के आर -पार सिर्फ वो , या जो उस जादुई छड़ी को चलाना जानता हो वही आ -जा सकता है।
उस दीवार के पार जाते ही वहाँ का माहौल कुछ इस तरह का है, सब वहाँ के लोग एक गोल घेरे जैसा ग्रुप बनाकर जिन्होने अपने कमर के नीचे प्रकतिक बने हुए कपड़े , ओर कानो मैं ,कुछ चमकीला लकड़ी की तरह पहना हुआ है , वह सब लोग हाथ मे एक बाश की लकड़ी को जमीन पर ठोक कर , आग के बनाये हुए गोल घेरे के अंदर खुशी से निर्त्य कर रहें हैं ।
वह जंगल का सरदार उस औरत को एक घास ओर लकड़ी से बने हुए घर मे कैद कर लेता है ।

वहीँ दूसरी तरफ वह तेरह , चौदह साल का जहाज के पीछे दौड़ने वाला बच्चा अपने हाथ मैं उस लाल गेंद से खेलते हुए जंगल के सरदार के पास पहूंचता हैं , ओर उस जंजीर मैं बँधी हूई उस औरत को देखता है ।
जंगल का सरदार उस औरत की निगरानी के लिए इस बच्चे को
नियुक्त करता है ।
परन्तु यह बच्चा ना जाने किस कारण वश इस औरत को जंगल के सरदार के चुंगल से छुड़ाना चाहता है , सभी लोग उस जादूई दीवार के वहाँ निर्त्य कर रहें है , ओर वह जंगल का सरदार अपनी शक्तियों को ओर अधिक शक्तिशाली बनाने के लिए ध्यान मगन हो जाता है , तभी वह बच्चा इस वक्त का उपयोग कर , उस गोल घेरे मैं रखें जादूई छड़ी की ओर आगे बढ़ता है , पर सामने से सरदार द्वारा एक ओर , उस छड़ी की निगरानी के लिए नियुक्त उस जंगल का एक आदमी उस बच्चे को वह छड़ी लेने के लिए रोकता है , परन्तु यहाँ पर उस बच्चे के आगे उस आदमी की एक नही चलती ओर वह बच्चे द्वारा दी गई एक पटखनी से ही बेहोश हो जाता है , ओर वह बच्चा एक छलाँग लगाकर जैसे ही उस गोल घेरे मैं रखे जादुई छड़ी को लेने की कोशिश करता है तभी सामने से एक विशालकाय हाथी , जोड़ से रम्भाते हूऐ उस बच्चे की ओर बढ़ता है , ओर वह बच्चा उस हाथी को देख चकित हो जाता है —

क्रमशः जारी —

Writing by-
श्याम सिंह बिष्ट
डोटल गाँव
उत्तराखंड
9990217616

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Shyam singh bisht

कवि , लेखक डोटल गाँव उत्तराखंड

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