पर्याप्त

मैं किसी का शिकार
तो कोई मेरा शिकार
यह दुनिया तो शिकारियों की
एक बस्ती है
सूरज की लपटों में जलकर यह जंगल
राख होने ही वाला है
खुद की खैरियत चाहते हो तो
एकमात्र विकल्प शेष है कि
लटक जाओ आग की लपटों की
आसमां छूती टहनियों पे
चाँद बनकर
और संजो लो खुद में थोड़ी सी शीतलता
बचा लो खुद में जो बाकी बची है
थोड़ी सी मानवता
जिन्दगी जीने के लिये
बना लो एक रास्ता
जो कठोरता की अग्नि से कोमलता को बचाने
के लिये पर्याप्त हो।

मीनल

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