गांव में खेतों सै फसल कट चुकी थी अब कार्य था दुबारा नई फसल उगाने के लिए बैलों द्वारा हल जोतने का , नई फसल उगाने के लिए हर बार की तरह बैलौ द्वारा खेत जोते जाते थे गांव में खेती कम करने के कारण लोगों के पास बैल कम ही बचे हुए थे ।

आज लक्षि दा – सुबह-सुबह अपना नहर के ऊपर वाला खेत जोतने के लिए अपने दोनों बैल , बिनु व हसिया बैल को हाथ में सिकर ( डंडी) लियै व बलद (बैल) कौ मुह मैं महाव ( रस्सी द्वारा बनी हुई जाली ) पहने हुए ले जा रहे थे , दोनों बैलौ द्वारा आपस की बातचीत कुछ इस प्रकार थी —

बिनु बलद – आज म्यर गूसै लक्षि दा हमगु राति – राति पर ऊठै है अब हसिया हअ (हल ) बाणक मार मार लाग गै , य नहर वाल गार बाणम मयर तो खुसयाल फरिक जानि ।

हसिया बलद – ठिक कूण क्ष बिनुवा , ऊ कऊल गौर, गोट मैं हमगु कस कूणक्षी राति पर कि अब पत चलल तूमगू , मयर मन ऊभ यस करण क्षि ऐक धर दैयो कानक कनजायाऊम कऊलिक ।

बिनु बलद- य लक्षि दा गै लै राति – राति पर तरोर हजिई ना हमगु सैतैण दिनि ना आपण सैतैनी ।

हसिया बलद- आज नहर वाल गारम पूरदा बलद , ललु व कऊ लै बाणि , चलो हम लै गार बै ,बे ऊनहु मिल अऊल , भत दिन है गि सयारक गारक हरि घा नि खायि ।

बिनु बलद- होय मोसायर लाग रै , को कै नि कौल ना तौ बिन मौसायर मैं कैं ऊजार लै , गोयो तो ऊ बखयीक शेर दा लौंड मार-मार बैर पुठ लाल करदूयु , नंग शाल ।

हसिया बलद थोड़ा समझदारी दिखाते हुए–पै ऊजयार नि जाई कर , कै क नुकसान करण भल बात नि हुन , ऊसक आजकल गौं मैं मैस अदु झाणि सब तलिह लैगि , गार ,भिर , मैं कैय हुण नि रय , जै लै हुण क्ष य बानरूक कवाद अरै कै नि धर राय ।

बिनु बलद- ठिक क्षु मिल सुण हैय , जोरल नि बला ना तो लक्षि दा सूण लयाहल , अब हिठ गार ऐ गो बाणि वाल

जैसे ही लक्षि दा – खेत जोतने वाले खेत में पहुंचे उनके बगल के खेत में ही पुर दा आधा हल जोतने के उपरांत आराम कर रहे थे ।

लक्षि दा- ओर हो पुर दा कै हूरि , कदू बैह हअ , बाण लिजि माट – सार तो नि हरय,

पुर दा – ना हौ दादि , ठीक है र , दयो (वारिष) है र आज भो ।

लक्षि दा – ओर शहर बटि तमर लोंड फोन आतै रूनाल ? और ह अखबार कौ लया ? कै नयी खबर अरै आजकल ?

पुर दा – जोर सै बोलते हूऐ -होय आतै रूनि दादि , य मयर नान लौंड जरक्षि बजार य लया,

लक्षि दा फिर दोबारा बोलते हुए – पै कै अरै नयी खबर ? बताऔ धि जरा ?

पुर दा – दादि बैई इंडिया मैच जित गै , कोहलील शतक मार दै , ओर दादि आजकल इन जानवरों पर भत अतयाचार हू रो यस लै खबर आज ईमा अ रै ।

पुर दा कि यह बात सूनकर – हसिया व बिनु बलदा कै कान खड़े हो गए ।

लक्षि दा बोलै – पुर दा अचछा कै लिख र हमा ?

पुर दा – दादि अब कै बतु , जो जानवर बुड़ ( बुड्ढा) हजारण क्षै ऊगै राम नगर कसाई को दै ऊणी , ओर शहरौ मैं तो खुलैआम जानवरों का बयापार हू र ।

लक्षि दा – यै तो भत गलत हु र , यू गोर , बलद , तो हमार , जिणक अधार क्षि , हमार खेति – बारि , तो ईनु पर तो चल रै ,
ना हो पुर दा -मि तो आपण जीवन मैं इन बलदगू रामनगर बैचणक काम कभि नि करूल ।

हसिया व बिनु – नै आपण गुसैं (बैलो का मालिक ) कि ऐसी बात सूनकर उनका मन फक्र से ऊंचा हो गया , ओर लक्षि दा नै खेत जोतना चालू कर दिया–

लक्षि दा – खेत मैं ऐक सीक लगानै कै बाद —-
लै हसिया , बिनुवा , नि दैख रयै आख , लै – मलहि को मैल ई , कथाहा जारक्ष ईकर – ईकर रै

— हसिया व बिनुवा बलद – मन- मन हसतै हूऐ अपनी धून मैं —- और खैत जोत तै हुऐ !

No votes yet.
Please wait...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *