फिर एक पलायन (पहाड़ी कहानी )

जिस माता-पिता ने पहाड़ों में रहकर पहाड़ों से भी ज्यादा हौसला वह कठोर परिश्रम करके अपने बच्चे को आज इस काबिल बनाया था कि वहां शहर में जाकर एक अच्छी जॉब कर रहा था ।
अब सिर्फ माता-पिता का एक ही सपना था अपने बेटे की शादी कर दी जाए और घर में अपने बहू और नाती पोते का मुंह देख कर जीवन के अंतिम क्षण अपने पहाड़ में ही व्यतीत हो जाएं ।
पर समय के गर्भ में क्या छुपा है कोई नहीं जानता आज रावत जी और उनकी पत्नी भी इन बातों से अनजान थे ।
आज रावत जी का बेटा अपनी जॉब से छुट्टियां लेकर घर आया हुआ था ।
मां ने अपने बेटे से कहा- बेटा अब तो तुम्हारी जॉब भी अच्छी लग गई है अब हम तुम्हारी फटाफट शादी कर देते हैं । कब तक हम तुम्हारे बूढ़े मां-बाप इन चारदीवारियों को ताकतें रहेंगे तुम्हारी शादी हो जाएगी तो घर का आंगन भी खिला रहेगा ,और हम लोगों का भी ध्यान रखने वाला कोई होगा । बूढ़े मां -बाप को और क्या चाहिए सिर्फ बुढ़ापे में एक शहारा ।
रावत जी बोलैे – बेटा तुम्हारी मां ठीक कह रही है अब तो तुम अपने पैरों पर खड़े भी हो गए हो और शादी लायक तुम्हारी उम्र भी हो गई है फटाफट शादी कर लो हम भी अपने बहू और नाति- पोतै का मुंह देख लेंगे , तुम्हारे बच्चे हो जाएंगे तो बच्चों के साथ हमारा भी मन लगा रहेगा ।

रावत जी के बेटे नै माता -पिता की बात सुनकर कुछ सोचने के उपरांत – अपने माता- पिता से बोला शादी तो मैं कर लूंगा वह करनी जरुरी भी है ।
पर पापा मेरी भी एक शर्त है, बेटे की बात सुनकर मां ने सोचा शायद बच्चा अभी भी खिलौने लेने वाली जिद कर रहा होगा , मां का हृदय है अपने बच्चों के लिए हमेशा सकारात्मक ही सोचता है । पर यहां बात कुछ और ही थी।
बेटा बोला-पापा शादी के बाद आप और हम लोग यहां पर पहाड़ों में नहीं रहेंगे , हम सब लोग शहर को चले जाएंगे, शहरों में जीवन यापन करने के लिए सारी मूलभूत सुविधाएं हैं ,ऊपर से आप लोगों का बुढ़ापा शरीर इस अवस्था में आप लोगों कि भी देखभाल जरूरी है ।
और मैं भगवान की दया से इतना कमा ही लेता हूं कि आप लोगों की उचित देखभाल कर सकूं ।

मम्मी – वहीं पर एक टू रूम सेट लेंगे जीसका फरंट 30 का होगा और लैट्रिंग -बाथरुम saprate होगा , और तौ और वहां जोशी जी व नेगी जी भी रहते हैं वह भी पहाड़ी है , आपका आना -जाना और मन लगा रहेगा ।
और पापा आजकल के वक्त में कौन सी पढ़ी -लिखी बहू खेती-बाड़ी करना चाहती है और आप ही देख लो बगल में जो लक्षी रहता है , वह भी अपने बच्चों को साथ लेकर चला गया है वह तो सिर्फ ₹ 10 -15 हजार कमाता है , मैं तो उससे फिर भी बेहतर हूं ।

बेटे की बात सुनकर पापा ने सोचा – शायद बेटा शहर जा कर इंग्लिश ज्यादा सीख गया हो तभी तो ऐसी बातैं कर रहा है ।
रावत जीे अपने बेटे से बोलै- बेटा शादी कै बाद अपनी पत्नी व अपनी मां को ले जाना , मैं यहीं पर ही रहूंगा मैं कहीं नहीं जाने वाला , बाकी तुम्हारी और तुम्हारी मां की मर्जी , जिसका जहां मन करे वही रहे मेरी तरफ से सब स्वतंत्र हैं !

 

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Shyam singh bisht

कवि , लेखक डोटल गाँव उत्तराखंड

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