इबादत की इमारत

सन्नाटों के पसरे हैं कदम
वादियों के छलके हैं नयन
विपदा की काली घटा है छाई
टूटने लगे हैं हर सू
सोये से स्वप्न
घर की दीवारें ढह गई
दरख्त सूख गये
उनके तनों से उतरकर
छालें छिल गई
यादें रह गई
बाकी रह गये उनके निशान
एक ईंट सरकाई
इबादत की एक इमारत
पेड़ से टूटी किसी डाल की तरह
पत्ता पत्ता बिखर गई।

मीनल

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