सो रही हो या जाग रही हो
या किसी की गिरफ्त में आकर
उससे भय खा रही हो
उड़ना भी तो अभी तुम नहीं
जानती
पंखों से उड़ान भरना सीखना तो
अभी बाकी है
किस्मत अच्छी है तुम्हारी कि
तुम्हें मिलने वाला अजनबी
भला आदमी है
नहीं तो अल्लाह जाने
तुम्हारा क्या होता
तुम्हारे पंख उगने से पहले
पहली उड़ान भरने से पहले ही
शायद तुम्हें कोई मार देता
तुम इतनी भोली हो
तुम्हें तो जीवन क्या है और
मौत क्या है
इसका अर्थ भी नहीं पता होगा
इसका भेद भी ज्ञात नहीं होगा
तुम मर भी गई होती तो
तुम्हें यह भी पता नहीं पड़ता कि
तुम्हें किसी ने मार दिया
तुम जीवित हो तो भी
इतनी नादान हो कि
तुम्हें तो जीवन का अर्थ भी नहीं
पता
यह जो छोटा सा जीवन है
लोग मरने से पहले उसे भी
दूभर बना देते हैं
बस हमेशा मनाना कि तुम्हें
लगातार अच्छे लोगों का साथ
मिलता रहे
यह जिन्दगी की सबसे बड़ी नेमत है
तुम तो बहुत छोटी हो
बड़ी होने पर भी दुनियादारी नहीं
समझोगी
यह भेद तो बड़े से बड़ा
इस दुनिया में रह रहा आदमी
भी नहीं जानता।

मीनल

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2 Comments

  1. gyanavani

    I really liked the poem. I enjoyed the rhythm and the simplicity. I liked the image of a bird that has not learnt to fly. Its a much used image and yet it works here

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  2. Minal Aggarwal

    Oh really.
    Your words of appreciation inspired me a lot.
    Keep guiding me.
    Thanks a lot.

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