जीना सिखा दिया

मुझे जीना सिखा दिया…..
ये एक कहानी है जो कि किसी के नाम या जीवन से जुडती है तो मात्र एक संयोग होगा।

भले ही शिव पूर्णतयः समर्पित नहीं था पर लगाव जरुर था लगाव ऐसा था की वो आज भी शिव के जेहन में ज्यों की त्यों बसी हुई है दूर रहते हुए भी कभी उसके बारे में गलत न सोंच पाया। हमेशा उसकी ख़ुशी चाही। आज भी उसके साथ गुजारे हुए पल याद आते है।

ज़िन्दगी के हर लम्हे को उसने “जीना सिखा दिया” आपको ये कहानी सुरु से सुनाता हूँ:

गर्मी का महीना, शाम का वक़्त था मैं घर में सभी के साथ खाना खा रहा था।
भाभी जी के फोन की घंटी बजी। भाभी जी ने फोन उठाया और बातें करने लगीं, बात करते करते मेरे से बोली ये लीजिये आपका फोन है बात कर लीजिये। मैं सोच में पड़ गया की किसका फोन आ गया इनके फोन में जो मेरे से बात करना चाहता है। खाना खाते हुए मैंने कहा कौन है कोई जरुरी बात हो तो पूछ लीजिये।
कोई जरुरी बात न है और आप खुद पूछ लीजिये कौन है

भाभी अगर जरुरी न है तो जो भी है उनको मेरा मोबाइल नंबर दे दीजिये और दिन में फोन करने को कह दीजिये।

भाभी ने कहा ठीक है। और ये बात मैं भूल गया।

आज मैं अपने ऑफिस में एक अधिकारी से बात कर रहा था अपने कालेज की एक यूनिवर्सिटी से सम्बद्धता के लिए। उसी दौरान एक फोन आया।
मैंने फोन उठाया, हैलो कौन?
उधर से आवाज आई आप शिव बोल रहे हैं?
हाँ , बताएं आपने कैसे कॉल किया? काम बताएं

काम तो तो कोई नहीं सिर्फ आपसे बात करनी है।

ओके ! अगर आपको सिर्फ बात करनी है तो आप मुझे एक घंटे बाद काल करिए अभी मैं व्यस्त हूँ एक मीटिंग में।
ओके मैं आपको बाद में काल करती हूँ कह कर काल डिस्कनेक्ट कर दिया।
इधर मैं अपने काम में व्यस्त हो गया। लगभग 2 घंटे बाद फिर से उसी नम्बर से फोन आया। मैंने फोन उठाया और सवाल किया अब आप बता दीजिये आप कौन बोल रहीं हैं और किस काम से फोन किया।
जवाब मिला, पहले भी बताया था सिर्फ बात करनी है
ओके जी, पर अब तो आप बता दें कि आप कौन बोल रही हैं और मुझे कैसे जानते है मेरा नंबर कैसे मिला इस तरह के कई सवाल एक साथ मैंने दाग दिए।
जवाब आया आप पहचानिए हम कौन है
मैं ऐसे कैसे कह सकता हूँ की आप कौन है कुछ हिंट दीजिये।
आपने ही तो अपने नम्बर में फोन करने को कहा था
मैंने कहा अब पहचान गया भाभी के फोन पर बात करने को मैंने मना कर दिया था अब तो अपना नाम बता दीजिये। और आप क्यों बात करना चाह रही थी ये बता दीजिये। मैं आपको नहीं पहचानता हूँ।
मेरा नाम सुभी है आपने मुझे देखा है एक शादी में मिले थे हम। पर तब न हम आपको जानते थे और न आप हमें। कोई काम नहीं था बस यूँ ही बात करना चाह रहे थे।
कुछ औपचारिक बातें करने के बाद फोन रख दिया।
धीरे धीरे हम लोगों की प्रतिदिन बाते होने लगी।……….
अब हम लोगों की बातें हर रोज काफी अधिक हो जाती थी।
तब फेसबुक और व्हाट्सऐप तो था नहीं। अक्सर मैसेज आदान प्रदान होते थे या सीधे काल।
अब हम लोगों की बातें अक्सर शाम के वक़्त होने लगी। लेकिन सुभी के मैसेज पढ़कर कभी कभी मुझे शक होता की शायद ये लड़की मुझे प्रसंद करने लगी है।
लेकिन फोन पर हमेशा सामान्य बात होती तो फिर सोंचता नहीं वो तो एक सामान्य मैसेज है।

इस तरह कई महीने गुजर चुके थे एक दिन फोन पर बाकी दिनों की ही तरह बात हो रही थी इसी दौरान उसने अपने प्यार का इजहार कर दिया।
मैंने इस बात के लिए कभी सोंचा भी नहीं था। मैंने फोन काट दिया।
दुबारा न तो सुभी का फोन आया और न ही मैंने किया।
कई दिन बाद सामान्य रूप से हमारी फिर से बात होने लगी। पर सुभी के दिल में मैं बस चुका था। पर उसकी हिम्मत न होती मेरे से कहने की।
एक दिन अचानक सुभी ने फिर सवाल किया शिव आप मेरे को प्यार नहीं करते न करो पर मेरे से दोस्ती करने में क्या हर्ज है। दोस्ती तो कर सकते हो।
सुभी इस बारे में अभी बात करने का मूड न है मेरा।
ओके शिव, हम इंतज़ार करते हैं……….

 

…ओके शिव, हम इंतज़ार करते हैं……….

अब सुभी हमेशा ये सवल करने लगी दोस्ती के लिए। मैं हमेशा बात टाल जाता।
एक दिन मैंने समझाया, सुभी मैं लडकियों से दोस्ती नही करता।

जो की पूर्णतयः सच नहीं था। फिर भी सुभी बिना किसी बहेस के मेरी बात मान गई। और पहले की तरह सामान्य बाते हमारी होती रहीं।
इसके बाद सुभी ने इस बारे में कभी बात नहीं की……
फिर एक दिन..
मैं अपनी सहपाठी अमिता से बात कर रहा था। इसी दौरान सुभी का वेटिंग में काल आया।
आमतौर पर मैं सबसे 1 या 2 मिनट बात करता था पर उस दिन मेरी बात अमिता जी फिर उनके पति से हुई तो लगभग 10 से जयादा मिनट मेरी बात हुई।
खाली होकर जब मैने सुभी को काल किया

उत्सुकतावस सुभी ने पूछ लिया, शिव आज आपने इतनी देर तक बात की। किससे बात हो रही थी?
जिस सहजता से सुभी ने पूछा वही सहजता से मैंने जवाब दे दिया अमिता से बात कर रहा था।
चूँकि सुभी को मेरे परिवार के व् अधिकतर दोस्तों के नाम पता थे सो सुभी ने सवाल किया की ये कौन हैं
मेरी दोस्त है
फिर क्या था
सुभी ने एक साँस में कितनी बाते बोली – मेरे से दोस्ती करने में क्या दिक्कत है जब दुसरे से दोस्ती किये हो और मेरे से झूठ बोलते हो लड़कियों से दोस्ती नहीं करता। इस तरह से बहुत सारी बाते कही मेरे से।
सुभी! अमिता मेरे साथ पढ़ती थी उसके एक 8 साल की बेटी तब थी जब साथ पढ़ते थे।

सुभी गुस्से से, तो मैं क्या करूँ तुम किसी से भी दोस्ती करो पर मेरे से दोस्ती करने में क्या हर्ज है।
काफी देर बहेश होने के बाद सुभी ने रोते हुए फोन कट कर दिया।
अब सुभी हमेशा मुझसे दोस्ती करने को कहती मैं कोई जवाब न देता तो बोलती की मेरे में वो कमी बता दो जिसकी वजह से दोस्ती नहीं करना चाहता। मैं कभी ये बात नहीं करुँगी।

मेरे पास कोई जवाब न था

दिन बीतते गए। इस बात को लेकर वो बहुत रोती फिर एक दिन
शिवा आज के बाद न तो मैं आपसे दोस्ती करने को कहूँगी। और आगे आप करना भी चाहोगे तो मैं हाँ नहीं कहूँगी।

सुभी जब ऐसा दिन आ जायेगा मुझे लगेगा आपसे दोस्ती करनी चाहिए तो मैं आपको मना लूँगा
दिन बीतते गए।
दिवाली का वक़्त था रात 10 बजे होंगे। मैं दोस्तों के साथ खेतों में घूम रहा था आज मैं बहुत ही असमंजस में था क्योंकि आज फिर से सुभी को दिन में फोन पर रोते हुए सुना था।

मुझे किसी के आँसू नहीं प्रसंद। और इसीलिए मैं किसी के सामने रोता नहीं। जब रोता हूँ ऐसा वक़्त कई सालो में आता है।

मैंने सुभी को फोन किया
हेलो सुभी…. हाल चाल पूछने के बाद मैंने कहा।

सुभी मैं आपसे दोस्ती करने को तैयार हूँ……..
शिव मुझे आपसे दोस्ती नहीं करनी
सुभी आपने आज न करके मुझे उस बात का अहसास करा दिया की आपको कितना बुरा लगता होगा जब मैं न कहता था
आज सुभी गुस्साए लहजे में बात कर रही थी फिर बोली अब मैं फोन रखती हु और फोन कट कर दिया।
मैंने दुबारा फोन करना उचित नहीं समझा।

लगभग 30 मिनट बाद मेरे फोन की घंटी बजी। देखा तो सुभी का फोन था फोन उठा कर
हाँ सुभी क्या हुआ

लगभग रोते हुए पर आज इस वक़्त वो ख़ुशी से रो रही थी।
शिव मैं आपको दोस्ती के लिए न कैसे कर सकती हूँ जिसके लिए मैं आपसे लडती थी तरसती थी आज वो मुझे मिल रही है ख़ुशी तो मैं न कैसे कर सकती हूँ।
हम दोनों बहुत रात तक बातें करते रहे। आज वो बहुत खुश थी खुश तो मैं भी था सुभी को खुश देखकर।
इस तरह हसी ख़ुशी से दिन बीतने लगे।
एक दिन सुभी ने कहा आप सामने से नहीं फोन पर तो किस दे ही सकते हैं। शिव ने इस बात को सुनकर अनसुना कर दिया।
हमारी पहले ही की तरह शाम को प्रतिदिन एक दोस्त की तरह बात होती थी
पर सुभी के मन में शिव के प्रति प्यार व्याप्त हो चुका था
एक दिन शाम के वक़्त शिव के फोन में सुभी का फोन आया बातों के दौरान सुभी ने कहा-
शिव कभी तो हमें भी थोडा प्यार दे दिया करो किसके लिए बचा के रखे हो
मैं समझा नहीं सुभी
अरे कभी कभी हमें भी न सामने सही फोन में ही किस विस दे दिया करो थोडा प्यार कर दिया करो इतना तो हक हमे भी है।
शिव ने कोई जवाब न दिया और बात बदलते हुए दूसरी बात करनी चाही
सुभी आज जिद पर थी और हाँ में ही जवाब सुन्ना चाहती थी।
पर शिव की ओर से कोई जवाब मिलता न देख बोली मुझमे कोई कभी है इसी लिए शिव आप मुझे प्यार नहीं करते। मुझमे क्या कमी है यही बता दो।
सुभी के बहुत जिद करने पर शिव ने कहा वक़्त आने दो। इससे ज्यादा कुछ नही कह सकता अभी।रही कमी की बात तो कमी किसमें नहीं है सभी में कुछ न कुछ कमी होती है
और सुभी आपमें मुझे कोई कमी नजर नहीं आती अगर कभी आई तो जरुर बता दूंगा।
सुभी कुछ न बोली
फिर नार्मल बाते होने लगी

…………………………………
सुभी का जन्मदिन नजदीक आ रहा था सुभी ने मुझे भी अपने दोस्तों के साथ पार्टी में आमंत्रित किया था साथ में ये भी कहा की मेरा जन्मदिन का गिफ्ट आपसे “किस के साथ विस” होगी।

पहली बार मैं किसी लड़की के जन्मदिन पर आमंत्रित था सो गिफ्ट के रूप में मैंने केक दिया। जो की मुझे खुद लेकर पार्टी में जाना था।
आज सुबह मैंने सुभी को फोन किया
हाय सुभी
हाय शिव
सुभी जन्मदिन मुबारक हो
थैंक यू शिव, लेकिन मुझे आपसे “किस के साथ विस” ही चाहिए। इसके अलावा और कुछ नहीं। और फोन कट

दोपहर में मैं अपने एक दोस्त के साथ जन्मदिन की पार्टी में गया जो की एक रेस्टोरेंट से होनी थी। सभी ने बहुत मस्ती की, शिव के द्वारा लाये गए केक को सबने बहुत प्रसंद किया।
पार्टी ख़त्म होने के बाद शिव अपने घर आ गया। लेकिन अभी भी सुभी की जिद वही थी।

शिव की तरफ से कोई उम्मीद न देख
सुभी गुस्से से बोली अब तो मुझे किस फोन पर नहीं सीधे ही होठों पर चाहिए और आज ही चाहिए मैं आपके घर आ रही हूँ। इतना कहकर सुभी ने फोन काट दिया।।

……..

 

फोन काटने के बाद शिव ख्यालों में खो गया…..

शिव अपने दोस्त नीरव से बात कर रहा था नीरव हम उम्र होने की वजह से शिव के लिए हमउम्र भाई जैसा था इस लिए खूब जमती थी।
दोनों अलग अलग एक दूसरे से बहुत दूर थे इसलिए रात में सभी कामों से फ्री होने के बाद 10 से 11 बजे दोनों फोन में बात करते थे सारे दिन की एक एक हाल खबर दोनों एक दूसरे को बताते।
फिर एक दिन…………
आज नीरव का बात करने का अंदाज बिलकुल अलग था ये शिव को इसलिए पता चल गया क्योंकि शिव किसी के दिल की भावनाओं को समझने में बहुत माहिर था।
नीरव क्या बात है कोई दिक्कत है तो बताओ..

नहीं कोई दिक्कत न है शिव..

नीरव मेरे से और मेरे विचारों से परिचित हो फिर क्यों झूठ बोल रहे हो अब बता भी दो जो बात है मैं कुछ नहीं कहूँगा।

शिव एक बात है आपसे कहूँ या न कहूँ पर ये जनता हूँ की आप ही मेरी मदद कर सकते हो…….
और फिर नीरव ने कुछ अपनी बात बताई।

नीरव की बात सुनने के बाद शिव ने अपनी और से पूरी कोशिश मदद करने को कहा।
शिव ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की पर……..

ज़िन्दगी में कुछ पल ऐसे भी होते हैं जब आप किसी की मदद करना चाहते हो और आपका मदद करना ही आप पर भारी पड़ जाता है।

कुछ ऐसा ही शिव के साथ हुआ था।

नीरव के लिए की गई मदद शिव पर खुद भारी पढ़ गई जिसका जवाब शिव खुद नहीं दे पा रहा था और न ही चुप रह सकता था
कहा जाये तो शिव के लिए एक तरफ कुआँ तो एक ओर खाई थी।

शिव ने वक़्त की नजाकत के हिसाब से सिर्फ मौन रहना उचित समझा।

अब शिव सिर्फ बातें सुनकर मौन रह जाता। जो कभी कुछ कहने की हिम्मत न करते थे वो आज सवाल करने लगे थे
शिव को सब प्रसंद था पर किसी की आँखों में आँसू नहीं। और एक दिन शिव की सब्र का बांध टूट ही गया…
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मोबाइल बज रहा था मोबाइल की आवाज से शिव ख्यालों से बहार आया देखा सुभी का फोन आ रहा था

शिव ने फोन उठाया फोन उठाते ही हाँ सुभी
शिव आई ऍम ऑन द वे. सो यू मीट मी इन योर होम. और फोन काट दिया।

शिव आँख बंद करके बिस्तर पर थके मन से लेट गया और सोचने लगा आखिर ये मेरे साथ ऐसा क्यों कर रही है क्यों मुझे परेसान कर रही है।
एक बार फिर शिव गहरी सोच में डूब गया।

सुभी क्यों दोस्ती के रिश्ते की सह पर प्यार का रिश्ता बना रही है। मैंने जिन परिस्थितिओं पर दोस्ती की थी वो वजह अलग थी। पर प्यार का रिश्ता निभा नहीं पाऊँगा बोल चुका हूँ फिर भी ये है की मानती नहीं।

फिर से सुभी की काल शिव के फोन पर आ रही थी।

हाँ सुभी

सारी शिव , मैं रास्ते से लौट आई। पहले तो रात हो रही ऊपर से आपको मैं दुखी नहीं करना चाहती और आपने ही सिखाया है बहुत ही जरुरी काम हो तो रात में निकलो अन्यथा नहीं।
आज तो रात होनी तय थी और इस बात के लिए आपको नाराज नहीं कर सकती।
हाँ दूसरी बात मेरी किस के साथ विस अब भी आपके ऊपर उधार है जब हमें वक़्त होगा आपको देना पड़ेगा कोई बहाना नहीं सुनेंगे।
शुभ रात्रि शिव
और फोन कट गया।
शिव ने अब सुभी को काल फिर से किया
हाँ शिव क्या हुआ
सुभी
बोलो शिव क्या बात है
सुभी मुझमे क्या ऐसा खास है जिसकी वजह से आप मेरे से इतनी नजदीकियां बढ़ा रहे हो मुझे नहीं लगता मैं कहीं से भी आपके लायक हूँ
न मैं दिखने में इतना खूबसूरत, न बहुत पैसे वाला इस तरह से कुछ भी तो न है मेरे पास।

जानती हूँ
यू नो शिव, मेरे अनुसार जब एक लड़की, जो सच में किसी को दिल से चाहती है तो न तो उसे बहुत पैसे की चाह होती है और न ही बहुत खूबसूरत चेहरे की।
रही बात मेरी तो मुझे जो भी चाहिए वो सब गुण आपमें हैं और सच कंहूँ तो मैं खुद आपके लायक न हूँ। जानते हो शिव मैंने आपको आपकी दौलत से नहीं और न ही आपके चेहरे को देख कर प्यार किया है।

आपका व्यक्तित्व ऐसा है जो मैं आपकी ओर अनायास आकर्षित हो गई हूँ।
शिव आपने हमेशा मुझसे कहा की मैं शायद वो खुशियाँ आपको न दे पाऊँ जिनका सपना तुमने सँजो रखा है पर सच ये भी है आपके सामने आपके गुणों के सामने मेरे सारे सपने कोई मोल नहीं रखते। मेरा विस्वास है जितना आपको समझा है मेरे सपने मुझे मिल जायेंगे।
इस दुनिया में चेहरे सुन्दर बहुत मिल जाते हैं पर दिल सुन्दर मिल जाये ऐसा मुस्किल से होता है।
जिसका दिल इतना सुन्दर हो जिसकी सोंच इतनी सही हो उसके साथ रहकर मेरे सपने अधूरे रह जाएँ हो ही नहीं सकता।
पता है शिव आपके साथ रहकर भले ही मुझे पैसे का सुख न मिले पर विस्वास और प्यार भरपूर मिलेगा। फिर हम दोनों मेहनत करेंगे तो हमारी जरूरतों की पूर्ति में कोई कमी नहीं होगी।
हमारा छोटा घर होगा छोटी गाड़ी होगी पर दिल से खुशियाँ ही खुशियाँ होंगी और क्या चाहिए मुझे।

शिव अब हम सोने जा रहें है आप भी ज्यादा मत सोंचो और कल बात करते हैं
शुभ रात्रि शिव
शुभ रात्रि सुभी
और फोन कट हो गया
शिव फिर से सोंच में डूब गया…

कब नीद आ गई पता ही न चला….

 

……………

सुबह जब शिव की नीद खुली तो उसे ऐसा महसूस हुआ कि शरीर में ताकत ही न है। बिस्तर से उठने का मन नहीं कर रहा था। आज शिव ऑफिस नहीं जाना चाह रहा था।
न चाहते हुए आज शिव आफिस गया…..
अब शिव का सुभी से बात करना तो होता पर मन से नहीं।
पर इस बात का अहसास सुभी को नहीं हो पाया.

2 दिन बाद, आज शिव् की छुट्टी थी आफिस में, वह घर ही था 1 बजे के लगभग सुभी का फोन आया।
हेलो शिव कहाँ हो
घर पर हूँ क्यों क्या हुआ

सुभी- घर पर ही रुकना हम आपसे मिलने आ रहे हैं।
शिव- अचानक, कोई काम
सुभी- हाँ, अपनी किस लेने आ रही हूँ क्योंकि तुम आओगे नहीं मुझे पता है

शिव- मत आओ सुभी सही न है ये। मुझे सही न लग रहा कुछ। आप भूल जाओ इस बात को

सुभी- क्या सही न है शिव? क्या गलत और क्या सही है मुझे पता है। शिव आपने हाँ बोला था किस के साथ विश के लिए फिर मुकर क्यों रहे हो?
सुभी वक़्त तो निकल गया वो दिन गुजर गया। अब जब आपका जन्म दिन आएगा तब देखा जायेगा।

सुभी गुस्से से- शिव मैं आ रही हूँ
शिव कोई जवाब दे पता जब तक इधर फोन कट हो गया।

शिव सोंच में डूब गया…..
कैसी जिद्दी लड़की है कुछ समझती ही नहीं दोस्ती कर ली तो अब जबरन प्यार की तरफ बढ़ रही है।

कैसे इस लड़की को समझाऊँ, कुछ सुनती ही नहीं…..

तकरीबन 1 घंटे बाद सुभी शिव के घर पहुँच गई।

तब शिव सोंच से वर्तमान में आ गया

हाय शिव

शिव कुछ न बोला

इत्तेफाक से आज घर पर शिव के अलावा कोई न था

सुभी- इतना गुस्सा आपको कब से आने लगा। आप तो गुस्सा करते नहीं।

शिव- सुभी गुस्सा न हूँ पर आप मुझे और मेरे विचारों को न समझ रही हो। इस बात का दुःख है मुझे।
दोस्ती ये सोच के कभी नहीं की थी की ये दिन आ जायेगा।
सुभी जिस रस्ते पर आप चलना चाह रहे हो मुझे सही नहीं लग रहा।

सुभी- शिव आपको किस बात का डर है की मुझे आपसे प्यार न हो जाये। अरे ऐसा न है तुम चिंता न करो।
और तुम्ही बताओ शिव जिसे मैं अपना दोस्त मानती हूँ फिर ऐसा दोस्त जो हमेशा सही राह दिखाता है उसे प्यार से एक किस करना या पाना गलत है क्या?

अब शिव के पास कोई जवाब न था क्या कहता कुछ न बोल सका।

सुभी ने मौके का पूर्ण फायदा लिया और शिव के होठों पर किस कर दिया।
शिव् इस स्पर्श से अन्दर तक हिल गया

शिव अब तुम मुझे किस करो

प्लीज…….

शिव कुछ तो बोलो इस तरह से चुप मत रहो

कोई जवाब न पाकर सुभी ने शिव को हिलाया…

हाँ सुभी

शिव किस करो न

पर शिव की हालत तो ऐसी थी जैसे जान ही न बची ही। बिलकुल जड़वत

इधर सुभी खुश भी थी अपनी जीत पर और उत्साहित भी की अब तो शिव किस करेगा ही।

शिव आई ऍम एक्साटेड ऐन्ड कांट वेट।

प्लीज शिव और इंतज़ार मत कराओ किस करो न।

सुभी आपने तो किस कर लिया और क्या चाहिए? मुझे किस करनी भी नहीं आती।

अरे बुद्दू लड़के मुझे पता है तभी करके बताया अब तुम करो किस मुझे।

शिव ने बहुत देर तक हिम्मत जुटा करके आखिर सुभी को किस किया।
आज सुभी के मन में आपने प्यार की जीत की ख़ुशी साफ झलक रही थी। कहने को भले ही सुभी ने ये सिर्फ दोस्ती का नाम दिया था।
करीब 1 घंटे तक सुभी शिव के साथ रही बहुत सी बातें की और फिर अपने घर चली गई।

सुभी के जाते ही शिव फिर से ख्यालों में खो जाता है।
जब इस लड़की को कोई और दिल से चाहता है उसे ये सब पता चलेगा तो वो क्या सोंचेगा मेरे बारे में। पर ये सुभी पता नहीं मेरे पीछे क्यों दीवानी है और मेरी प्रॉब्लम नहीं समझ रही।

रिश्ते को आगे बढ़ाने को मना करता हूँ तो मेरे से अलग तरह से ही सवाल करने लगती है।

आज भी मुझे याद है जब पहली बार रिश्ते के लिए मन किया था तो क्या क्या बोल रही थी

शिव मैं जानती हूँ मैं आप जितनी न तो सुन्दर हूँ और न ही समझदार हूँ इसके अलावा मुझे जो प्रॉब्लम है उसे लेकर मुझे कोई प्यार नहीं। इसीलिए आप भी मुझे अपने से दूर रहना चाहते हो या दूर रखते हो।

इस तरह की बात सुनकर ही मैंने दोस्ती की। दोस्ती करने के कुछ दिन बाद अब ये मुझे प्यार के लिए फिर से ………..
अब मैं प्यार के लिए हाँ कैसे कह दूँ

इतने में शिव का फोन बजा
फोन की आवाज से शिव ख्यालों से बहर आ गया मोबाइल देखा तो सुभी का फोन था फोन उठा कर

हाँ सुभी
शिव हम वक़्त से घर पहुच जायेंगे पहुँच कर बात करते है और आज हम बहुत खुश हैं अब फोन रखते हैं।

घर पहुँच कर सुभी ने शिव को फोन करके घर पहुँचने की इन्फार्मेशन दे दी।

………….. …………… …………..

रात में खाना खाने के बाद सुभी का फोन आया आज सुभी अपनी जीत पर खुश थी इसलिए बहुत सी बाते बताती रही और शिव हाँ न करके जवाब देता रहा।

अब सुभी शिव को कुछ ज्यादा फोन करने लगी थी धीरे धीरे प्यार के लिए हाँ करने के लिए शिव पर दबाव बनाने लगी इस बात से शिव को गुस्सा बहुत आता पर सुभी इस बात को नजरअंदाज कर देती।
शिव के गुस्सा हो जाने पर हर तरीके से शिव को मनाती।
सुभी का मनाने का अंदाज ही इतना निराला था की शिव को मनना पड़ता था।

सुभी और शिव दोनों की ज़िन्दगी बहुत ही खुशहाली में बीत रही थी

अब शिव का जन्मदिन आ रहा था जिसे लेकर शिव से ज्यादा सुभी उत्साहित थी

शिव को जन्मदिन को लेकर उत्साह इसलिए नहीं था क्योंकि कोई जन्मदिन मनाना तो बड़ी बात थी मुबारकवाद भी देने वाला नहीं था

हाँ दो चार फेसबुक और आर्कुट पर दोस्त थे जो विस की औपचारिकता पूरी कर देते थे
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आज रात 12 बजते ही शुभी ने शिव को जन्मदिन की बधाई एक प्यारी सी किस के साथ दी। जो की सुभी अक्सर अब फोन पर किस किया करती थी।

सुबह उठते ही सुभी ने फिर से जन्मदिन की बधाई शिव को दी और रात में फिर से।

सुभी ने आज जो भी जिस अंदाज में शिव से बोली, शिव के दिल में एक अलग छाप एक अलग जह बना ली।

आज शिव सोंच रहा था कि ऐसी ही खुशियों के खातिर लोग जन्मदिन का इंतज़ार करते है।

अभी तक जिस इन्सान ने बहुत लोगों को(उसमे सुभी भी शामिल है) ख़ुशी से ज़िन्दगी जीना सिखाता था आज अब वो खुद सुभी से ज़िन्दगी जीना सीख रहा था।
शिव को भी सुभी से मोहब्बत हो गई । जब शिव ने सुभी को अपनी मोहब्बत इजहार किया तो सुभी बहुत खुश हुई।
शिव हमें आपसे मिलना है
सुभी ऐसी क्या बात है बता दो आप
शिव मिलोगे तब बताएँगे हम आपके पास आ रहे है और आज आप हमें रोकोगे नहीं
कुछ घंटे बाद सुभी शिव के सामने थी शिव को देखते ही सुभी शिव से लिपट गई।
क्या हो गया सुभी दूर हटिये हमसे कोई देख लेगा तो क्या कहेगा।
इतना सुनते ही सुभी और तेजी से बच्चों की तरह चिपक गई और फूट फूट कर रोने लगी।
सुभी क्या हो गया कुछ तो बोलो रो क्यों रहे हो?
शिव हमें कभी अपने से अलग मत करना, हम आपके बिना जी नहीं पाएंगे मर जायेंगे और शिव के चेहरे पर किस की बरसात कर दी।
सुभी ने शिव के जुबान से आई लव यु सुनने के लिए कितनी मेहनत की, कितना रोई, कितना तड्पी ये सिर्फ या तो कुछ शिव समझ सकता था या पूरी तरह से सुभी।
शिव आज हमें आपके साथ बाइक पर घूमने जाना है। शिव ने सुभी की बात मान ली। दोनों बाइक पर घूमने निकल गए।
सुभी बाइक पर शिव से लिपट कर बैठी थी जैसे वह शिव की एक पल के लिए छोड़ना नहीं चाह रही थी।
अब सुभी जब तक दिन भर में कम से कम एक बार शिव के मुख से अपने लिए आई लव यू नहीं सुन लेती सुकून न मिलता।
फिर एक दिन शिव ने सुभी से एक सवाल किया।
सुभी आप मुझे कब से चाह रही हो।
शिव मैं आपको तब से चाहने लगी थी जब आपसे नार्मल फोन में बात किया करती थी आपकी बैटन ने मुझे दीवानी बना दिया था पर कभी कहने की हिम्मत न कर पाई।

फिर आपके ही किये सवालों से मुझे बल मिला और हमने आपसे अपने दिल की बात कह दी।
आपने इनकार किया तो मुझे बहुत दुःख हुआ साथ ही ये समझ आया की मैं गोरी और सुंदर न हूँ इसलिए आपने इनकार किया, लेकिन मैं गलत थी, बातों से पता चला आपके लिए चेहरे की सुन्दरता और गोरा होना कोई मायने नहीं रखता तो मुझे खुशी हुई की बन्दे में कोई तो बात है जो एक लड़की के प्रपोजल को सिरे से नकार रहा है।

अब आपको पाने की चाहत और बढ गई। हर सम्भव प्रयास किया हमने आपको पाने के लिए।
पर अपने कभी नजदीक आने न दिया।
इस बात से ज्यादा और ज्यादा आप पर फ़िदा होती गई। कई बार तो लगा आप मुझे कभी नहीं अपनाओगे इस बात से टूट गई।
आपकी ही सही सलाह से फिर से अपने को मजबूत किया।
शिव इस बात से कभी मत परेशान होना की आप मुझे पूर्णतः प्यार दे पाओगे या नहीं। सच तो ये है की 10 प्रतिसत भी मुझे मिल जायेगा तो मेरे लिए बहुत है।
जो गैरों का अपनों की तरह सहारा बन सकता है वो अपनों को कभी दुखी नहीं देख सकता। जिसका जो हक है उसे आप वक़्त के साथ बखूबी देते आये हो और आगे भी देते रहोगे । यही विस्वास है की मुझे जो भी जितना भी चाहिए उतना आप जरुर देंगे।

अब अक्सर दोनों का साथ में वक़्त बीतने लगा। सुभी ने अपने घर में शिव के बारे बता दिया।

शिव ने सुभी से जिंदगी जिंदादिली से जीना सीखा, कोई अपना होने का अहसास कैसा लगता है ये सीखा और भी बहुत कुछ……..

दोनों के घर वाले शादी के लिए पहले ही तैयार थे।
अब दोनों अपनी ज़िन्दगी एक दूजे के साथ हंसी ख़ुशी से बिताने लगे।
ये थी मेरी लिखी कहानी “”जीना सिखा दिया””

सभी पाठकों से अनुरॊध है मेरी ये कहानी कैसी लगी जरुर बताएं।

सुबोध उमराव
ग्राम कुन्दे रामपुर,
पोस्ट विरनई
जिला फतेहपुर उत्तर प्रदेश 212601
Whatsaap मो 9208147111
subodhpatel.ftp@gmail.com

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