शान तिरंगा है

न झुका तिरंगा न झुकने देंगे ||
ये जन जन की हुंकार है ||
बलिदान शहीदो की इस झण्डे में ||
बसी हुयी जो जान है ||
गर्व से सारे मिल कर बोलो ||
मेरा देश महान है ||
तीनो काल के चिन्ह यही है ||
यही वेदो का सार है ||

यही पे गंगा यही पे जमुना ||
यही पर संगम धारा ||
चारो धर्म के लोग यही पर ||
गजब का भाई चारा ||
विश्वगुरु बन उभर रहा फिर ||
यही सभी त्यौहार है ||
तीनो काल के चिन्ह यही है ||
यही वेदो का सार है ||

यही अयोध्या यही पर मथुरा ||
यही पे बाबा काशी ||
कई वर्षो से लीन यही पर ||
बड़े बड़े सन्यासी ||
हर संकट की दवा यही पर ||
सम्भव सब उपचार है ||
तीनो काल के चिन्ह यही है ||
यही वेदो का सार है ||

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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