परिपक्व

परिपक्व

पढ़ने के लिए

किताबें हैं

खेलने के लिए कोई

साथी नहीं

घर एक कैदखाना है

खेल का मैदान नहीं

बचपन में ही तेज रफ्तार

समय के बोझ ने

इतना परिपक्व कर दिया

खिड़की से झांककर

आंखों में भर लूं

धुंधले से सर्द बर्फीले खूबसूरत

कायनात के नजारों को

फिर वापिस तल्लीन होना है

अपने अनचाहे कामों में

यह कैसी जिन्दगी मिली मुझे

जिसने मुझसे मेरा बचपन छीन

लिया

भागदौड़ की जिन्दगी में

सब व्यस्त हैं इतने कि

एक घर में रहते हैं

एक छत के नीचे

एक कमरे में बैठे हैं

और सब एक दूसरे से अंजान हैं

आज के युग के मां बाप भी

बच्चों के लिए मां बाप से नहीं

हम सब क्या पैसा कमाने की

मशीन भर बन के रह गये हैं

कि एक दूसरे के साथ

वक्त गुजारने के लिए

खुशियां मनाने के लिए

मुस्कुराने के लिए

खेलने के लिए

दुख दर्द बांटने के लिए

जिन्दगी साथ गुजारने के

लिए

हम तैय्यार ही नहीं।

मीनल

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