समंदर में एक कंवल खिलेगा
बादल का टुकड़ा आसमान से
टूटकर जो
इसके आगोश में गिरेगा
उफनते तूफानों को सम्भालेगी आज
सागर की लहरें
किनारों पे पलती मोहब्बत की
दीवारों का जो इसे सहारा मिलेगा
एक हसीं दिलकश मय में डूबा नजारा
मिलेगा
किसी हसीना का दिल
उसकी शोखियों का नजराना
एक प्यार का धीमी आग पे
सुलगता अफसाना
और उसके साजो सामान का
खजाना मिलेगा।

मीनल

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