प्रेम और विस्वास एक कड़ी है दोनों साथ तो रिश्ते में खुशियाँ हैं गर एक भी अलग हुआ तो रिश्ता रह पाना मुश्किल हो जाता है प्रेम और विस्वास की असीम पराकास्ठा को समझने के लिए प्रस्तुत है ये रचना:

जीवन तुम्हें अर्पण

प्रेम समर्पण जीवन अर्पण,
नहीं दूजी कोई फरियाद करूँ
एक पल भी न गुजरे तेरे बिना,
हर लम्हा हर पल, तुझको ही याद करूँ
प्रेम समर्पण जीवन अर्पण…….

अक्सर तेरा ख्वाबों में आना होता है
ख्वाबों में आना, आकर हँसाना
प्यारी बातें तेरी, वो तेरा मुझे मनाना
कुछ पल का नहीं अहसास है,
हर पल को तू मेरे पास है
प्रेम समर्पण जीवन अर्पण…….

जीवन की डगर, बड़ी ही बेखबर
जो राहों में संग चलने को तेरा साथ है
तू ही मेरा विस्वास है
जीवन के इन लम्हों पे जो तू मेरे साथ है
फिर डरने की नहीं कोई बात है
हाँ ये ही है मेरा
प्रेम समर्पण जीवन अर्पण…….

सुबोध उमराव

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