यादों का काफिला

यादों का काफिला

तुम्हारी याद को ओढ़कर सो जाऊं
सुबह उठूं तो चाय में शक्कर की तरह घोलकर
पी जाऊं
यादों का काफिला तो अब ताउम्र चलेगा
कोई भूले तुम्हें तो भूले
मैं जीते जी तुम्हें कैसे भूल जाऊं।

मीनल

Rating: 4.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

Leave a Reply

Close Menu