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नीलपरी

नीलपरी

आसमान से उतरी
एक नीलपरी
नीली नीली मेरी आंखों में बस गई
एक मोरपंखी सी
नीले कंवल की कली
हरी दूब पे
ओस बिखरे पत्तों पे
मंडराती हो ऐसे
जैसे कोई फूलों सी कोमल
तितली के पंखों सी खिलती
धूप में नहाई
चमकीली
फसलों सी लहलहाती
कचनार की एक कच्ची अबोध कली
उठती गिरती मचलती लहरों पे
तैर जाती हो ऐसे
जैसे कोई रंगबिरंगी अरमानों की सोन मछली
मेरे स्वप्नों में आती हो
ऐसे जैसे
श्री कृष्ण की मुरली
मेरे जीवन के रंगों में खिल
जाती हो ऐसे
जैसे मोर के पंखों की छतरी
मुझसे जुदा होकर
कहीं दूर चली न जाना
आसमां के नीले रंग सी
आसमां में न मिल जाना
जमीं से दूर
मेरी अंखियों से ओझल
मेरी दुनिया से दूर
किसी दूसरी दुनिया में
खो न जाना
खुद का दामन मुझसे छुड़ा
ओ मेरी आशाओं की
नीली चिंगारी सी डोर
कहीं आसमां की नीली बिजली
में तीर सी मेरी कमान से
निकल
एक श्याम वर्ण के
कृष्ण स्वरूप भक्ति रंग में
खो न जाना
डूब न जाना
मुस्कुराहट की लकीर मेरे होठों
पे खींच
किस्मत की बगिया के फूल
मेरे जीवन में सींच
मुझे भरोसे की जंजीर में जकड़
मुझे अलविदा कह
किसी कल्पनालोक में खो
न जाना।

मीनल

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