प्रतिबिम्ब
प्रतिध्वनि
परछाई बनना
पर मेरे प्रतिद्वंदी न बनना
मेरे जीवन के खाली कैनवास को
रोशनियों के अम्बारों से भरना
पर इसकी घुटन भरी गलियों में
और अंधेरा न करना
भूल का अहसास हो तो
पश्चाताप की अग्नि में जलना
पर मेरे आंगन में होने वाली
खुशियों के सवेरे को
उगने से मत रोकना
मेरा स्वागत जोश खरोश से भले ही न करना
पर मुझे आलिंगनबद्ध करने को
मेरे द्वार पे खड़ी आतुर
सुनहरी आशाओं के किरणों के जाल को
मेरी जीत के उपहार को
मेरे गले में पड़े संतुष्टि के हार को
प्रेषित होने में
प्रस्तुत होने में
उपलब्ध होने में
सम्भव होने में
सच होने में कभी
बाधा उत्पन्न मत करना।

मीनल

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