यही मेरी आशीष है

यही मेरी आशीष है

बच्चो भविष्य तुम्हारा ||
खुद है तुम्हारे हाथ में ||
चाहो इसे सजा लो ||
य फूंक दो उत्पात से ||

माना युवा अवस्था ये ||
झकझोरती बहुत है ||
यौवन की पुष्प कलियों से ||
जोड़ती बहुत है ||
मन चंचल न होने देना ||
बचना दृष्टिपात से ||
चाहो इसे सजा लो ||
य फूंक दो उत्पात से ||

छूते रहो गगन को ||
करते रहो पढाई ||
आपस में हो भाईचारा ||
सूझे नहीं लड़ाई ||
बच के सदा तुम रहना ||
उस भितरघात से ||
चाहो इसे सजा लो ||
य फूंक दो उत्पात से ||

सफलता कदम को चूमे ||
बहारो में उमंगें झूमे ||
आशीष है बड़ो का ||
सब काम होंगे पूरे ||
लोगो को मोहित कर लो ||
उत्तम विचार से ||
चाहो इसे सजा लो ||
य फूंक दो उत्पात से ||

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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