कान्हा

कान्हा

मेरा कान्हा
बांसुरी वाला
मोर मुकुट वाला
मटकी फोड़ माखन खाने वाला
मोहक छवि वाला
मन को छलने वाला
कभी बालक कभी भगवान का
रूप धरने वाला
सभी कष्टों को हरने वाला
खुशियों को जीवन में भरने वाला
यमुना तट पे गोपियों संग नृत्य
करने वाला
मेरे मन मंदिर में
एक सहज सरल जीवन सा
बहने वाला
मेरे दुख दर्द के विष
को अमृत करने वाला
मेरी नस नस में लहू का संचार
मेरे हर पल में समय का प्रवाह
मेरे कण कण में
स्वर्णिम ऊर्जा का बहाव
मेरे संसार में एक अलौकिक
संसार का सृजन करने वाला
कान्हा
मेरी शरीर रूपी मटकी में
दुविधाओं को मथने वाला
चुम्बकीय आकर्षण के बन्धन का
प्रसाद रूपी मक्खन अपने मुख से
मेरे होठों पे लगाने वाला।

मीनल

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