जीवन चक्र

जीवन चक्र

समुन्दर भी रास्ते देते हैं
जंगल में खो जाने के लिए
कांटे लहूलुहान करते हैं
पहाड़ के शिखरों पे चढ़ जाने के लिए
आसमान छूते आसमान चूमते
दरिया फिसल जाते हैं
समुन्दर की गोद में डूबने के लिए
जीवन चक्र ऐसे ही चलते हैं
शुरुआत से अंत
अंत से फिर एक नई शुरुआत
करने के लिए।

मीनल

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