शहजादी

शहजादी

जरी वाले नारंगी लहंगे की
हरी गोटेदार किनारी
एक दुल्हन का लिबास है
आगे न जाने क्या हो
उसके जीवन की कहानी
कजरारी अंखियों से आंसू बह गये हो
उसके चिकने गालों पे ठहर गये हो
उसे कोई क्या समझे
वो रह रह के मुस्कुरा रही हो
पलट पलट के देख रही हो
बल खा रही हो
ऐसी बला की कातिल अदा को कोई
क्या समझे
बोलती हो तो फूल झरते हों
खामोश रहती हो तो आशिक
आहें भरते हों
गुजर जाती हो जो दिल के मकां के
पास से तो
चौराहें रास्तों के पीछे चल देते
हों
एक परी है
शहजादी है
किसी के दिल की जन्नत
किसी के लिए एक गुमनाम गली में
रहती उदासी है
कुछ मीठी है कुछ खट्टी है
ताजी ताजी महकती है
किसी कोने से न बासी है
जैसे चल रही थी
ऐसे ही चलती रहे उसके जीवन की
कहानी
आहिस्ता आहिस्ता
लबों पे आई है मुस्कान
हौले हौले
जीना है अभी तो
उसे बदस्तूर और
ज्यादा
अभी तो उसमें जान बाकी है
उम्मीदों से परे भरपूर।

मीनल

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