गम -ए -शौक़

गम -ए -शौक़

सारे शौक़  जिंदगी के खत्म हो गए ,

अब बस जी ! शौक़ ए गम रह गए ।

गम-ए-दर्द का इलाज भी गम-ए-दवा ,

गम-ए-दवा को हम आहों में तलाश आए ।

दर्द ए-गम के साज पर गाने लगे जब तराना ,

अश्क सिसकियों का राग  फिर छेड्ते गए ।

तक़दीर जब तक राज़ी थी ,खुशियों दर पर थी ,

रूठी  जब से ये खुशियों को भी पर लग गए ।

अब तो ये आलम है ‘अनु’ न जां जाती है न गम ,

इस नमुराद मकां में हम कैद हो कर रह गए।

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ओनिका सेतिया 'अनु'

संक्षिप्त परिचय नाम -- सौ .ओनिका सेतिया "अनु' , शिक्षा -- स्नातकोत्तर विधा -- ग़ज़ल, कविता, मुक्तक , शेर , लघु-कथा , कहानी , भजन, गीत , लेख , परिचर्चा , आदि।

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