सपनों की रानी

सपनों की रानी

फूल सा तेरा चेहरा
गीत क्या लिखूं तेरे रूप पे
सौंदर्य की देवी तू
श्रृंगार रस की कविता
मादक इतनी जैसे शराब हो
पावन इतनी जैसे जलता चिराग हो
मुस्कुराती जो खिलकर
ओस गिर जाती गुलाब की
पंखुड़ियों पर
लज्जाती, सकुचाती तो छुईमुई के पत्ते सिकोड़ लेते
अपना तन मन
कलम में भरूं फूलों का रस
या आंखों का पानी
तेरे होने का अहसास भर है
चाँदनी रातों के चाँदी के बर्तनों से
छलकती तेरी स्वर्णिम जवानी
सितारे मोतियों से एक तार में
खुद को पिरो लेते
सजाते तुझे
स्वीकारते
उतारकर शीशे सा तुझे दिल में
बना लेते अपने
सपनों की रानी।

मीनल

Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

Leave a Reply

Close Menu