महगाई फिर नृत्य करेगी ||
बढ़ जायेगे भाड़े ||
अर्थ व्यवस्था खण्डित होगी ||
खाने के पड़ेगे लाले ||

अफसर नेता मौज करेंगे ||
लेंगे नफा व्यापारी ||
फिर किसान गरीब के बर्तन ||
बजते रहेंगे खाली ||
भरी तिजोरी उन पतियों के ||
हँसते रहेंगे ताले ||
अर्थ व्यवस्था खण्डित होगी ||
खाने के पड़ेगे लाले ||

सब्सिडी न नेता छोड़ेगे ||
लेंगे टी ए डी ए ||
घपले बाजी वाला सौदा ||
करता रहेगा पी. ए ||
मूरख चंद्र से जनता बोलेगी ||
पड़ गये किसके पाले ||
अर्थ व्यवस्था खण्डित होगी ||
खाने के पड़ेगे लाले ||

शम्भू नाथ कैलाशी

Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *