गुरु-शिष्य परम्परा

गुरु-शिष्य परम्परा

आप अपने तरीके से सीख रहे हैं
मैं अपने तरीके से सीख रहा हूं
आप अपने हिसाब से सीखा रहे हैं
मैं अपने हिसाब से सीखा रहा हूं
नई पीढ़ी है नई सोच
नई जवानी है नया जोश
नई उमंग है नई तरंग है
नवजीवन में नया प्रवेश
नई दिशा नई भोर
चलो हम सब हाथ पकड़
समानांतर रेखाओं से चलते हैं
कहीं कोई टकराव भी हो
तो एक दूसरे का सम्मान करते
समस्याओं को हल करते हैं
युग-युगांतर से चली आ रही
गुरु-शिष्य परम्परा को
जस का तस सआदर कायम रखते हैं।

मीनल

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