गगनचुम्बी इमारतें
पर गगन को छूती हैं क्या
बीच बस्ती बहते दरिया
एक दूसरे के किनारों को छूते हैं क्या
यह आकाश कितना विशाल है
पर इसे अपने इस गुण का आभास है
क्या
यह सफेद बादल आसमानी
आसमान के दिल के टुकड़े हैं
जब दर्द इनका छलकता है
बारिश की बूंदों सा घुंघरू
बजाता
अपने सफर में
एक छोर से दूसरी छोर
बरसता है
तो यह छन छन बिखर जाते हैं
और आसमान का दिल
किस कद्र फटता है
यह जो कौंधती बिजली सा कड़कता है
इन्हें इस सच्ची चाहत का
खुदा की इबादत सी मोहब्बत का
गुमान है क्या
यह जो कुछ पाकर खोना होता है
और फिर भी उसे दिल में
सहेजकर बांधकर रखना होता है
उस रुई से कपकपाते
कपास से बुने कपड़े में
सुरक्षित
भावनाओं की एक निरंतर
बहती नदी का
स्थिरता से खुद को साधना
यह अकाल्पनिक पर स्वप्न बुनो तो काल्पनिक
अवस्था का अवलोकन एवं अनुमान है क्या।

मीनल

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