खंडहर खाली हैं
वीरान हैं
पर मिट्टी में मिलने से अभी भी
डरते हैं
रेत में उगे नागफनी के पौधों से
यह फख्र से सिर उठाकर
अपने होने का
अपने वजूद का
अब भी दम भरते हैं
महलों की सुंदरता को लोग निहारते
हैं तो
खंडहरों के अतीत को भी लोग तलाशते
हैं
यादों की एक खिड़की खुलती है जब
एकांत में उनके समीप बैठ
वो मोहब्बत और वफा के गीत
गुनगुनाते हैं
खंडहर खंडहर भर नहीं
यह भटकती आत्माएं हैं किसी के
वास की
एक अहसास है पूर्व
जन्म के आभास की
एक आवागमन करती सांसों की श्रृंखला है इस
जीवन के पुनर्वास की
एक अलंकारिक राग है जो बांधता है
कल, आज और कल
के पुलकित फूलों को एक बन्धन में
यह तो अनमोल अंश हैं
हमारी सभ्यता के
यह तो बहुमूल्य धरोहर हैं
हमारे इतिहास के
यह तो जीवंत उदाहरण हैं
खोयी हुई सांसों के
यह तो एक अविस्मरणीय दास्तानों के दस्तावेज हैं
विभोर गाथाओं के गौरव के
यह तो पूरक हैं निरंतर प्रकट
होती क्षतियों के
यह तो संयोजक हैं उत्सव के प्रयोजन
में प्रयुक्त व उपयुक्त प्रबल मनोवृतियों के।

मीनल

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