कृष्ण का वृंदावन

कृष्ण का वृंदावन

मैं सूरज की आग हूं
चाँद की शीतलता हूं
समुन्दर की गहराई हूं
आसमान की विशालता हूं
एक पहाड़ियों की श्रृंखला पे
निःशब्दता का ध्वज लहराती
प्रेम की तृष्णा भी हूं
मैं एक रहस्य हूं
मैं एक पहेली हूं
सुलझाने की मुझे कदापि चेष्टा
मत करना
तुम और उलझ जाओगे
बस दूर रहकर शांतचित से पढ़ो
मेरे मन के भाव
एक शांतिवन
एक उपवन
एक मृगनयनी की चितवन
एक मधुवन
एक तपोवन
एक कृष्ण का वृंदावन
तुम खुद के भीतर पनपता पाओगे।

मीनल

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