पिता

एक वृक्ष की तरह होते हैं पिता,बिघ्न-बाधा को झेलकर कुटुम्ब को पालते हैं पिता,सारी समस्याओं को सुलझाकर चेहरें पर हँसी लाते हैं पिता,अपनी अभिलाषाओं को दबाकर बेटे-बेटियों की खुशियों की चाहते हैं पिता,इसलिए तो देवतुल्य होते हैं पिता,एक पिता का कुटुम्ब ही उसका संसार होता है उसी संसार में अपनी प्रेम समर्पित कर देते हैं पिता

:कुमार किशन कीर्ति

मूल नाम:सोनू कुमार पाण्डेय

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Kumar kishan kirti

युवा शायर,लेखक

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