ऐ भोले पशु ( कविता)

ऐ भोले पशु ( कविता)

इस इंसानों की दुनिया में तेरा कहाँ ठिकाना है ,
ठोकरें खाते हुए इधर -उधर जीवन तूने गुज़ारना है ।
खाने को फेंका हुआ अन्न ,खाद्य -पदार्थ जहर (प्लास्टिक ) के साथ ,
अन्यथा नसीब में लिखा कभी भूखे मरना है।
क्या करें ? स्वार्थ से भरी है दुनिया ,और तू है निस्वार्थ प्राणी ,
नहीं समझता है न तू ,यह दुनिया तुझे समझती बस खिलौना है।
तुझसे जी भी लगाया ,तुझसे खूब फायदा भी उठाया ,
उचट गया जी , पूरा हुआ अपना काम , तो तुझे घर से निकाल दिया ,
अब तुझे प्यारे ! बेघर ,बे मालिक होकर तुझे इन सड़कों पर ही मरना है।
हाय ! भगवान की बनाए भोले , निष्कपट ,निस्वार्थ , दयालु ,
और नेक जीव !हे शुद्ध संस्कारी आत्मा !
ज़ालिम ! दंभी , लालची , घमंडी इन्सानो की दुनिया में नहीं कोई तेरा ठिकाना है।

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ओनिका सेतिया 'अनु'

संक्षिप्त परिचय नाम -- सौ .ओनिका सेतिया "अनु' , शिक्षा -- स्नातकोत्तर विधा -- ग़ज़ल, कविता, मुक्तक , शेर , लघु-कथा , कहानी , भजन, गीत , लेख , परिचर्चा , आदि।

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