मेरी शायरी

मेरी एक ही राय,मैं बन जाऊ चाय और तुम्हारी होंठो को छूकर मेरा दिल भी बोले बाय-बाय
शायद उसे भी इश्क रास ना आई,मैं पुकारता रहा पर वो मेरे पास ना आई

:कुमार किशन कीर्ति

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Kumar kishan kirti

युवा शायर,लेखक

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