यादों की सीपें

मेरा घर
मेरे कमरे की खिड़की
और उससे झांकता मेरा
बचपन
नजरों में भरता शहर के
नजारे
आंख के कैमरे से खींचता
हसीं मंजरों के दृश्य ढेर सारे
यौवन की दहलीज पारकर
पहुंचा जब उम्र के आखिरी
पड़ाव पर
खनकाता बीते लम्हों
से भरी गुल्लक को
पलटकर छनकाता जो उसे
निकल आती एक एक करके यादों की सीपें
मेरी गुजरी जिन्दगी के पूरे
समुन्दर से।

मीनल

Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

Leave a Reply

Close Menu