🇮🇳हिन्दी हिन्द की बिन्दी 🇮🇳

#हिंदी_है_हम🇮🇳
#हिंदी_है_हम_वतन_है।🇮🇳
#हिन्दोस्तां_हमारा_हमारा।।🇮🇳

हम हिन्दुस्तान में रहते है, हिंदी मात्र भाषा है हमारी, तो उससे इतना परहेज क्यों? क्यो अंग्रेजी भाषा को हम अपनी योग्यता सिद्ध करने के लिए उपयोग में लाते है? क्यों हम स्वयं को शर्मिंदा महसूस करते है, अगर हमें अंग्रेजी भाषा नहीं आती? शर्मिंदा तब होना चाहिए अगर आपको हिंदी नही आती! अगर आप अपनी मातृभाषा के कारण स्वयं को पिछड़ा हुआ पाते है, तो आपको अपने चरित्र, विचार और आचरण पर मनन करने की आवयश्कता है। कभी देखा है किसी चीनी, जापानी या अन्य किसी भी देश के वासी को अपनी भाषा पर शर्मिदा होते हुए। अपनी संस्कृति पर सकुचाते हुए! नही देखा होगा। सब अपनी मातृभाषा को प्यार करते है, उसका सम्मान करते है। एक तरफ हम है जिनके लिए शिक्षित होने का तात्पर्य बस अंग्रेजी भाषा पर मजबूत पकड़ होना है। कोई अंग्रेजी कपडे पहन ले और बस फ़र्राटेदार अंग्रेजी बोल ले तो उसे ही सबसे उपयुक्त दावेदार मान लिया जाता है। हम इंग्लैंड में निवास नहीं करते है जिसके कारण हमारे लिए अंग्रेजी आवश्यक है। हम भारतवासी है और हमारी प्राथमिकता हिंदी है और हिंदी ही होनी चाहिए।

आज परिस्थितियां थोडा बदली है। हमारे प्रधानमंत्री माननीय मोदीजी जहाँ भी जाते है हिंदी भाषा का प्रयोग ही करते है। उनकी तरफ से ये उनका अपना नजरिया है अपनी मातृभाषा को सम्मानित करने का और सम्पूर्ण देशो को ये जताने का भी की हिंदी हमारे लिए शर्म का नही अपितु गर्व का विषय है और हमें हमारी भाषा से कोई शर्म नहीं है।

हिंदी बहुत ही खूबसूरत भाषा है इसमें लिखने पढ़ने का अलग ही आंनद है। हिंदी में भावनाओं की अभिव्यक्ति जितने सुंदर ढंग से की जा सकती है उस स्तर की सादगी और सुंदरता शायद ही किसी और भाषा में पिरोई जा सकती हो।

अपने हृदय के भावो को आप कभी हिंदी में पिरोकर देखिये, और महसूस किजिये उन शब्दों की मिठास को जो केवल हिंदी में मिलती है। हम हिन्दुस्तानियों को अपनी भाषा का प्रचार-प्रसार सम्पूर्ण जगत में करना चाहिए। यहाँ मेरा हिंदी का समर्थन करने का आशय यह बिलकुल नहीं है की आप संसार की बाकि भाषाओं का अवलोकन ना करें, अवश्य करें। क्योकि भाषा चाहे जो भी हो, किसी भी प्रान्त की हो अथवा किसी अन्य देश की हो, अगर आपको मौका मिलता है तो अवश्य सीखे। किसी भी अन्य देश की या अन्य प्रान्त की संस्कृति या भाषा सीखने में कोई दुर्विचार नहीं है बल्कि बिना सोच-विचार करे अपनी संस्कृति या भाषा को त्यागकर दूसरी संस्कृति या भाषा का अनुसरण करना अवश्य विचारणीय विषय है। हिंदी भाषा को उपेक्षित मत होने दीजिये, हर संभव प्रयास कीजिये उसको प्रसारित करने का। हिंदी को दोयम दर्जे पर मत रखिये, अपनी मातृभाषा को विस्तार दीजिये तभी आप सही मायने में अपने देश को, उसके नाम (हिन्दुस्तान) को सार्थक कर पाएंगे, और गर्व से गा पाएंगे=-

हिंदी है हम, वतन है।
हिन्दोस्तां हमारा हमारा ।।
आप सभी को हिंदी – दिवस की हार्दिक बधाई।

🌹रूपा🌹

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