जीवन पथ

रख धैर्य धीर
तू क्यों विचलित होता है

आसमां सा कद बना ,,
समुन्द्र सी गहराई ,,

एक उड़ान भर , नई ऊर्जा भर ,,
ना रख आश की प्यास तू ,,
तू एक नई पहचान रख ,,

हर तरीकत में तू बांध कर रख
ना टूटे जीने की आस की एक नई अरमान रख !!

तू क्यों विचलित होता है ,,
तू “उगता हुआ सूरज” है थोड़ा धैर्य रख

स्वरचित – मनकेश्वर महाराज “भट्ट”
मधेपुरा , बिहार

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Mankeshwar Kumar Maharaj

गृह शिक्षक , लेखक , कवि

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