कविता

⚛️कविता 🎆

कविता हो।
तुम मेरी कविता हो।
चन्दन – सी, चंचल – सी,
हृदय के उपवन में
लचकती हुई लता हो।
मेरी कविता हो।

गौरांगी, सुनैना,
मितभाषी, मृगनैना हो।
चंदा की कौमुदी – सी,
मेरे अंधेरे जीवन में
प्रकाश करती सविता हो।
मेरी कविता हो।

प्रिया हो, प्रेयसी हो,
प्रेम की सुधा हो।
पतझड़ में बहार – सी,
मेरे सूखे हुए मन में
मधुमास का पता हो।
मेरी कविता हो।

सावन की घटा हो।
भोर की छटा हो।
प्रेम की बयार – सी,
योगेश के विचार में,
कवि मन की कल्पना हो।
मेरी कविता हो।
तुम मेरी कविता हो।
——————— योगेश कुमार पाण्डेय।

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