वफा की हद

वफा तलाशुं जो इंसान में
नहीं मिलती
यह संसार है
बिना सिंदूर भरी मांग
एक विधवा सा
न पैरों में पायल
न हाथों में चूड़ियों की खनक
यहां मिलती
यह इश्क ओ वफा के किस्से
किताबी हैं
इनके जायके की महक
दिल की गली से
गुजरती
मोहब्बत की दुकान में नहीं
मिलती
ऐ मेरे प्यारे श्वान
तू इंसा तो नहीं
खुदा का बनाया इस जमीं पे उतारा एक
फरिश्ता है
हम लोगों को अता कुदरत का एक
अनमोल तोहफा
तू वफा की हद है
आ तुझे गले लगाकर
कुछ दिल के दर्द को हल्का
कर लूं
तू समझेगा इसे बखूबी
यकीं है मुझे
तू बेजुबान है
लेकिन आंखों की
भाषा पढ़ता
अपनी रूह से जान को जिस्म में
उतारता एक करिश्मा है।

मीनल

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