पिता

पिता के बारे में क्या लिखूँ?बस इतना ही जानता हूँ मैं ईश्वर की पूजा नहीं करूँ मैं,लेकिन पिता की ही पूजा करता हूँ मैं

कुटुम्बों के पालन करने में पिता जो त्याग करते हैं, उनके उपकारों को हम क्या?देवगण भी नहीं चुका सकते हैं प्रेम और अनुशासन के प्रतीक होते हैं पिता

अपने बच्चों में ही तो अपनी प्रतिबिम्ब देखते हैं पिता,एक पिता का कुटुम्ब ही उनका संसार होता है, जिसके लिए प्यार उनकी आँखों में नजर आता है

पिता तो उस वृक्ष के समान होते हैं,जो आतप, शीत वर्षा सहकर भी अपनी कुटुम्बों की रक्षा करते हैं, पिता की एक आशीष से दुर्गुण भाग जाते हैं, पिता के चरणों मे ही तो चारों धाम पाए जाते हैं

:कुमार किशन कीर्ति

No votes yet.
Please wait...

Kumar kishan kirti

युवा शायर,लेखक

Leave a Reply

Close Menu