गुलाबी मोम का गुलाब और तुम

गुलाबी मोम का गुलाब और तुम

वाणी से मीठा शहद टपका
रही हो
आंखों से प्रेम के समंदर छलका
रही हो
गुलाबी रंग के
मोम के गुलाब पे
यहीं ठहर जाने को
उसके दिल में जलते दीये की
लौ सी बस जाने के लिए
उसके हृदय से चिपकी खड़ी हो
ऐसा प्रतीत होता है
जैसे उड़ना नहीं चाहती हो तुम
मोह के बंधन में बंध गई हो
अनंत मनोहर दृश्य प्रस्तुत कर रही है
यह सृष्टि तुम्हें
पर इस प्रलोभन में
जो सच है पर
तुम्हें झूठा लग रहा है में
फंसना नहीं चाह रही हो तुम
तुमने तो उपवन के समस्त फूलों
की सज्जा अपने नयनों में भर ली
उनकी तस्वीर अपने
दृष्टिपटल पे अंकित कर ली
उनके पराग का रसपान कर लिया
उनके करीब रहकर उनके साथ
पल दो पल विश्राम भी कर लिया
अब लौट आई हो तुम अपनी
मंजिल की तरफ
पूरा ध्यान केंद्रित कर लिया है
तुमनें खुद पे
खुद के विकास पे
पाना या खो देना कुछ जीवन में
यह सब तो मिथ्या है
पर दृष्टिगोचर हो सम्पूर्ण जगत
का सृजन एक बिन्दु पर
यह तुम्हारी साधना और
इसके परिणामस्वरूप कुदरत का
तुम्हें एक अति सुंदर उपहार है।

मीनल

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