प्रेम बवंडर

हम जानी दिल हमरै टूटा॥
ई प्रेम बवंडर सब का लूटा॥

केहू केहू कै घर बसाइस ॥
केहूँ केहू का लैके डूबा॥
ई प्रेम बवंडर सब का लूटा॥

केहू केहू कय बाग़ सजाइस ॥
केहू केहू कय तोरिस खूंटा॥
ई प्रेम बवंडर सब का लूटा॥

केहू केहू का हार पिन्हाइस
केहू केहू का मारिस जूता॥
ई प्रेम बवंडर सब का लूटा॥

केहू केहू कय साथी बनिगा॥
केहू केहू का कहिस कलूटा॥
ई प्रेम बवंडर सब का लूटा॥

केहू केहू का दूर भागाइस
केहू केहू कय आनंद चूसा॥
ई प्रेम बवंडर सब का लूटा॥

केहू केहू का गले लगाइस ॥
केहू केहू कय दर्पण फूटा॥
ई प्रेम बवंडर सब का लूटा॥

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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