मर्ज ये बन गया है किसी का

दर्द दे कर दफा हो गयी हो//
मर्ज ये बन गया है किसी का //

मौत हंसने लगी अबतो मुझपर //
अब भरोसा नहीं जिंदगी का //

देख पाया न बच्चो की बगिया //
ये कहती तुम्हारी है सखिया //

धोखा देना न अब तुम किसी को //
ये तमाशा नहीं दिल्लगी का //

दर्द दे कर दफा हो गयी हो//
मर्ज ये बन गया है किसी का //

मौत हंसने लगी अबतो मुझपर //
अब भरोसा नहीं जिंदगी का //

मौत से जीत जब जाऊगा मै //
नाम मुख पर रहेगा तुम्हारा //

और सपना नहीं है सजाना //
कुछ सहारा नहीं है गति का //

दर्द दे कर दफा हो गयी हो//
मर्ज ये बन गया है किसी का //

मौत हंसने लगी अबतो मुझपर ///
अब भरोसा नहीं जिंदगी का //

शम्भू नाथ कैलाशी

No votes yet.
Please wait...

शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

Leave a Reply

Close Menu