कर लेती है खुद से ही बेवफाई तभी तो वो तेरी कहलायी

कर लेती है खुद से ही बेवफाई
तभी तो वो तेरी कहलायी
किसी की माँ
किसी की बेटी
किसी की पत्नी
किसी की प्रेमिका बन पायी
कर लेती है खुद से ही बेवफाई
तभी तो तुमसे वफ़ा की ,हर रस्म निभा पायी
चुनती नही जो
खुला गगन
सफलता की चोटी
परिन्दे सी ऊंची उड़ान
जीवन की रंगीनियां
बना लेती है वो
माँ बापू के चरणों में खुला आसमाँ
संस्करों को सफलता की चोटी
सादगी को परिन्दे के पंख
परिवार की खुशी में जीवन की रंगीनियां
कर लेती है खुद से ही बेवफाई
तभी तो वो तेरी कहलायी
कर लेती है खुद से ही बेवफाई
तभी तो तुमसे वफ़ा की ,हर रस्म निभा पायी।।

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