गुजरा जमाना

चेहरा खिला खिला
दिल मुर्झाया
सूरज की धूप में
टिमटिमाते तारे देख
मुझे चाँद याद आया
सूरज की तपिश छोड़ कभी
चाँदनी रातों में याद
कर लेना मुझे
गुनगुनाते अफसानों में
मोहब्बत का सुहाना सफर
कभी एक गुजरे जमाने की तार
हिलाता
एक सलोना झिलमिलाता सा
मुखड़ा बन उतर आऊंगा।

मीनल

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