फूलों के गुंचे

यह तस्वीर है
एक गुलिस्तां की
फूलों से भरे गुलिस्तां की
दूर से जो कैमरे में उतारी
सारे फूल कहीं खो गये
उनकी खुशबुयें भी हवाओं में
दूर कहीं बह गई
शूल भी धूल की चादर ओढ़
वादियों में कहीं सो गये
दूर से देखो तो
होते हैं बस आभास
पास आकर
दिल में कभी उतरकर तो
देखो
दिल महक उठेगा
दिल के दर्द कम होंगे
दिल की चुभन कम होगी
दिल के अहाते खुद एक फूलों से लदे
चमन होंगे
आंखों से नहीं
दिल के गर्त से महसूस करो
दिल बर्फ की मजार नहीं
दिल ज्वालामुखी के धधकते अंगार
नहीं
दिल किसी दूसरे के दिल की
दीवार पे लचकते फूलों के
गुंचे होंगे।

मीनल

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