मेरी शायरी

1 यूँ मेरे इश्क को ना ठुकराया कीजिए,सामने रखी जाम को होंठो से लगा लीजिए,कोई पूछे इश्क-ए-जाम किसका है?तो शौक से मेरा नाम ले लिया कीजिए

2यूँ ही नहीं मिलती मंजिल किसी को बहुत कुछ खोना पड़ता हैं, एक बसंत को पाने के लिए पतझड़ को भी सहना पड़ता है

:कुमार किशन कीर्ति

Rating: 1.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

Kumar kishan kirti

युवा शायर,लेखक

Leave a Reply

Close Menu