जिंदगी में दौर इम्तिहान का जो चल रहा

दौर इम्तिहानों का जो चल रहा
क़भी हार रहा क़भी जीत रहा
क़भी उलझा किसी सवाल में
क़भी किसी सवाल का जवाब बन रहा
जिंदगी में दौर इम्तिहान का जो चल रहा
उलझा सा हूँ कश्मकश की ज़िन्दगी में तो क्या
हर जंग जितने का हुनर मुझमें ही तो है छुपा।।

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